‏ Psalms 14:1-3

1मूर्ख
मूर्ख स्तोत्र संहिता के मुताबिक वह जिसमें नैतिकता की कमी है
मन ही मन में कहते हैं,
“परमेश्वर है ही नहीं.”
वे सभी भ्रष्‍ट हैं और उनके काम घिनौने हैं;
ऐसा कोई भी नहीं, जो भलाई करता हो.

2स्वर्ग से याहवेह
मनुष्यों पर दृष्टि डालते हैं
इस आशा में कि कोई तो होगा, जो बुद्धिमान है,
जो परमेश्वर की खोज करता हो.
3सभी मनुष्य भटक गए हैं, सभी नैतिक रूप से भ्रष्‍ट हो चुके हैं;
कोई भी सत्कर्म परोपकार नहीं करता,
हां, एक भी नहीं.
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